विश्व हिन्दू परिषद, केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक (उपवेशन), हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

विश्व हिन्दू परिषद, केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक (उपवेशन)
09 अप्रैल सन् 2021, चैत्र मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि विक्रमी संवत् 2077, शुक्रवार
अखण्ड परमधाम, रानी गली, भूपतवाला, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

हरिद्वार 09 अप्रैल। विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल (उपवेशन) की बैठक अखण्ड परमधाम आश्रम हरिद्वार में आयोजित की गयी। बैठक का शुभारंभ अखण्ड परमधाम के परमाध्यक्ष युग पुरुष स्वामी परमानंद महाराज, निर्वाणी पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, स्वामी अविचलदास, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती महाराज ने किया। बैठक की अध्यक्षता जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने की। इस उपवेशन की प्रस्तावना विहिप के महामंत्री मिलिन्द परांडे ने रखते हुए कहा –
1. रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए।
2. देश के सभी मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर किया जाए।
3. देश की एकता अखण्डता को खतरा पैदा करने वाली धर्मांतरण एवं सामाजिक विद्वेष उत्पन्न्ा करने वाले विषयों पर चर्चा कर समाधान करने का प्रयास किया जाए।
4. मद्रास हाईकोर्ट द्वारा पलनीय के कार्तिकेय मंदिर के संदर्भ में लिए गए निर्णय कि भक्तों का ट्रस्ट बनाकर मंदिर में पूजा-अर्चना की जाएगी एवं उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय के द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर में उत्खनन के आदेश का स्वागत किया गया।
उपवेशन में उपस्थित समस्त संतजनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा मंदिरों का अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। इस विषय पर एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। साथ ही निर्णय लिया गया कि अधिग्रहित मंदिरों का सरकारी नियंत्रण समाप्त होना चाहिए। इसके लिये जनजागरण का अभियान चलाने का संकल्प भी लिया गया। उपवेशन में उपस्थित उत्तराखण्ड सरकार के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चार धाम देव स्थानम् बोर्ड विधेयक के विषय में संत समाज को आश्वासन देते हुए कहा कि इस विषय पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने कुंभ क्षेत्र को मांस-मदिरा मुक्त करने की घोषणा के साथ ही कुंभ के लिए संतों को होने वाली भूमि आवंटन की स्थाई डिजिटल व्यवस्था की भी घोषणा की। जो संतजनों का आदेश होगा उसका पालन होगा। उपवेशन में लव जिहाद और धर्मांतरण पर व्यापक चर्चा की गयी। अयोध्या में निर्माणाधीन भगवान श्रीराम के मंदिर की प्रगति एवं वर्तमान स्थिति के बारे में तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री एवं विहिप के केन्द्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने जानकारी दी तथा श्रीराम मंदिर समर्पण निधि अभियान के विषय में केन्द्रीय संगठन मंत्री विनायक राव देशपांडे ने भी विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान की।
म0म0 स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि कुंभ मेले के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद की यह बैठक संत समाज के विचारों का मंथन है जिससे अमृतरूपी विचार निकलेगें जिससे सम्पूर्ण विश्व में सार्थक संदेश जाएगा। म0म0 स्वामी हरिचेतनानंद ने देश की ज्वलंत समस्या लब जिहाद पर आक्रोश प्रकट करते हुए कहा कि यह विधर्मियों की सोची समझी साजिश है जिसके खिलाफ केन्द्र सरकार प्रभावी कानून बनाए। शादाणी दरबार के नवम् पीठाधीश्वर डाॅ0 युधिष्ठर लाल ने संत समाज से आग्रह करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने आने वाले हिन्दुओं का भारत में शरण मिलनी चाहिए वहां हिन्दुओं की जा दुर्दशा हो रही है व हिन्दुत्व के ही नहीं वह मानवता के लिए भी चिंता का विषय है। म0म0 स्वामी ज्ञानानंद गीता मनीषी, म0म0 स्वामी प्रेमानंद, म0म0 स्वामी रूपेन्द्राप्रकाश,स्वामी चिदानंद मुनि, स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती आदि संतगणों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मंदिरों का अधिग्रहण समाप्त हो, देश की भूमि पर बढ़ती जा रही कब्रगाहों, मजारों पर प्रतिबंध लगे, देश में मठ-मंदिरों पर सरकारी टैक्सों को समाप्त किया जाए। गौ, गंगा की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया जाए।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने सी0एम0 तीरथ सिंह रावत देव स्थानम् बोर्ड में जोड़े गये 51 नये मंदिरों को इससे मुक्त करने साथ ही बोर्ड की समीक्षा के आश्वासन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण में प्रसन्न्ाता व्यक्त की। इस अवसर पर स्वामी कृष्णाचार्य डाॅ0 रामेश्वरदास वैष्णव, महंत नौत्तम स्वामी, योगीराज दिव्यानंद, डाॅ. श्याम देवाचार्य, महंत कन्हैया दास, स्वामी अखिलेश्वर दास, स्वामी कृष्ण चैतन्य स्वामी, स्वामी परमानंद, महंत उमेश नाथ-उज्जैन, स्वामी परमानंद सरस्वती-राजकोट, स्वामी चिदानंद मुनि, महंत विष्णुदास, महंत फूलडोल बिहारी दास जी, महंत सांवरिया बाबा, महंत राजेन्द्र दास, महंत रामजी दास, महंत गौरी शंकर दास, महंत धर्मदास, महंत वंशीवट पीठाचार्य जयराम दास, महंत सुरेश दास, महंत वैष्णव दास, महंत परशुराम दास, म0म0 हरिहरानंद, स्वामी प्रखर महाराज, स्वामी विश्वेश्वरानंद-रोहतक, स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती, स्वामी ज्योतिर्मयानंद गिरि, स्वामी अभयानंद सरस्वती, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी चिंतप्रकाशानंद, स्वामी रवीन्द्रपुरी-निर्वाणी, महंत दुर्गादास, महंत रघुमुनि, मुख्यिा महंत भगतराम, महंत जगतार मुनि, स्वामी हंसराम, आदि उपस्थित रहे।
उपवेशन का संचालन विहिप के केन्द्रीय मंत्री अशोक तिवारी ने किया। उपवेशन में पधारे संतजनों का स्वागत विहिप के संरक्षक दिनेश चन्द्र, कार्याध्यक्ष अलोक कुमार, महामंत्री मिलिंद परांडे, संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे, संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा, केन्द्री मंत्री जुगल किशोर, केन्द्रीय प्रबंध समिति के सदस्य धर्मनारायण शर्मा, सहमंत्री हरिशंकर, क्षेत्र संगठन मंत्री मनोज वर्मा, प्रांत उपाध्यक्ष भारत गगन, प्रदीप मिश्रा, संध्या कौशिक, प्रांत धर्माचार्य प्रमुख राकेश बजरंगी, प्रांत सह-संगठन मंत्री अजय, प्रांत समन्वय मंच प्रमुख पंकज चैहान, बजरंग दल प्रांत संयोजक अनुज वालिया, जिलाध्यक्ष नितिन गौतम, कार्याध्यक्ष बलराम कपूर एवं जिले के पदाधिकारियों ने किया।

प्रस्ताव:- 01

अपने इस प्राचीन देश में हिन्दू धर्म की रक्षा में तथा यहां के चिरंतन ऐसे अध्यात्म ज्ञान के प्रसार में मंदिरों की एक अहम भूमिका रही है। हमारे मंदिर अनादिकाल से समाज जागरण और अध्यात्म ज्ञान प्रसार के, उपासना के तथा राष्ट्र जागरण के और सामाजिक परिवर्तन के शक्ति केन्द्र रहे हैं। आज भी ऐसे अनेक मंदिरों में करोड़ों भक्त श्रद्धा से दर्शन के लिये जाते हैं और श्रेष्ठ अनुभूतियों का अनुभव करते हैं।
पिछले डेढ़ हजार वर्षों से आक्रमण के कालखण्ड में हमारे मंदिर हिन्दू समाज तथा धर्म-संस्कृति व प्रेरणा के, शक्ति और धर्मधारणा के महत्वपूर्ण केन्द्र होने से निरंतर ही आक्रमण और विध्वंस के लक्ष्य रहे हैं। बाद में ब्रिटिशों के कालखण्ड से उस समय के राज्यकर्ताओं ने मंदिरों के लिए विविध कानून लाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करना प्रारंभ कर दिया। दुर्भाग्य से भारत स्वतंत्र होने के बाद भी यह कब्जे की गलत परंपरा मंदिरों के अधिग्रहण के रूप में विविध राज्य सरकारों द्वारा अनवरत अभी भी चल रही है।
विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल के सभी धर्माचार्यों का, संतों का यह सुविचारित मत है कि हिन्दू मंदिरों के ऊपर केवल हिन्दू समाज का ही स्वामित्व रहना चाहिए। इसलिए अब भारत के संविधान में आवश्यक वह परिवर्तन करते हुए मंदिरों के प्रबंधन में, उनकी सम्पत्ति में, विविध धार्मिक व्यवस्थाओं में सरकारों का किसी भी प्रकार से स्वामित्व या सहभागिता नहीं होनी चाहिये तथा ऐसे योग्य कानून बनाने की अपेक्षा विश्व हिन्दू परिषद का केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल करता है और धार्मिक आस्था के अनुसार चलने वाली प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही मंदिरों की पूजा पद्धति शास्त्रों के अनुसार हिन्दू समाज के पूज्य धर्माचार्यों के, विद्वानों के, भक्तों के मार्गदर्शन में अबाधित रूप से चलनी चाहिए। मंदिरों का संचालन, प्रबंधन, वहां की उपासना, पूजा पद्धति मंदिरों का स्वामित्व यह किसी भी सरकार के, सरकारी अधिकारियों के या न्यायालयों का विषय नहीं हो सकता है। इसीलिए जो लाखों-लाखों मंदिर आज सरकारी नियंत्रण में हैं उनको मुक्त करने की मांग मार्गदर्शक मण्डल करते हुए उसके सुयोग्य संचालन और प्रबंधन के लिए और उसकी संपत्ति के संरक्षण करने के लिऐ एक योग्य व्यवस्था हिन्दू समाज में आज निर्माण करने की आवश्यकता है। मंदिरों को समाजाभिमुख बनाते हुए धर्म-संस्कृति-समाज के शक्ति – केन्द्र के रूप में पुनः खड़ा करना आज समय की मांग है। मंदिरों का सरकारी नियंत्रण समाप्त करके हिन्दू समाज के ही नियंत्रण और मार्गदर्शन में सभी मंदिरों का योग्य प्रबंधन करने के लिये हिन्दू समाज का व्यापक जागरण और प्रबोधन करने की भी आज आवश्यकता है। इस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिये विश्व हिन्दू परिषद का यह केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त करता है।

प्रस्तावक: म0म0 अखिलेश्वरानंद जी महाराज
अनुमोदक: स्वामी डाॅ0 श्यामदेवाचार्य जी महाराज

दिनांक 09 अप्रैल, 2021