श्रीराम जन्मभूमि निधि समर्पण अभियान

जय श्रीराम

रामो विग्रहवान् धर्म:। राम धर्म के मूर्तिमन्त प्रतीक हैं। भारत की आत्मा हैं। अपना समाज श्रीराम के आदर्शों को अहर्निश अपने जीवन में जीने का प्रयत्न करता है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मन्दिर भारतीय समाज-मन की शाश्वत प्रेरणा है। इसके लिए हिन्दू समाज ने 492 वर्षों तक अनवरत संघर्ष किया है।

 

तेजस्विता पूर्ण इतिहास

अतीत में 76 संघर्ष हुए। चार लाख से अधिक लोगों का बलिदान हुआ। 22 दिसम्बर 1949 को राम जन्मस्थान पर मध्य के गुम्बद में श्रीराम लला-मूर्ति का प्राकट्य हो गया। तब से वहां पर    श्री रामलला का दर्शन पूजन निरन्तर हो रहा है।

1984 में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा दिल्ली में प्रथम धर्म संसद का आयोजन किया गया। इसमें भारत के पूज्य सन्तों ने श्रीराम जन्मस्थान को मुक्त कराकर वहां भव्य राम मन्दिर बनाने का आह्वान किया तथा 'श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति' का गठन किया। सहित देश की सन्त-शक्ति के आदेश अनुसार ही हिंदू समाज का यह 77 वाँ आन्दोलन सफलता तक पहुँचा है।

समाज जागरण के विविध प्रयास

1984 में देशभर में राम जानकी रथ यात्राओं का आयोजन किया गया। हिन्दू समाज के बढ़ते दबाव के कारण 1 फरवरी 1986 को मंदिर के ताले खोलने का आदेश मिल गया।

1989 में 6.25 करोड़ नागरिकों द्वारा 2.5 लाख गांवों से पूजित शिलाएँ मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या भेजी गईं।

9 नवम्बर 1989 को राम जन्मभूमि पर भव्य मन्दिर के लिए शिलान्यास समारोह में पूज्य सन्तों की उपस्थिति में प्रथम शिला अनुसूचित जाति के बन्धु श्री कामेश्वर चौपाल ने रखी।

1990 की कार सेवा ने सरकारों के अहंकार को भंग  कर दिया। अनेक शौर्य सम्पन्न युवकों के अद्भुत पराक्रम और बलिदानों के फलस्वरूप दिसम्बर 1992 में दासता का वह विवादित ढाँचा धराशायी हो गया तथा भव्य राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। स्वर्गीय अशोक जी सिंघल कि यह श्रद्धा थी कि "राम मंदिर के निर्माण में ही राम राज्य की संकल्पना निहित है।"

न्यायिक प्रक्रिया

आस्था का यह विषय न्यायालयों की लम्बी प्रक्रिया में फँस गया। अन्ततः वयोवृद्ध  अधिवक्ता श्री केशव पारासरन एवं अन्य दृढ़ निश्चयी अधिवक्ताओं ने अनथक परिश्रम से सर्वोच्च न्यायालय में विजय प्राप्त की।

पौराणिक साक्ष्यों, पुरातात्विक उत्खनन, रडार तरंगों की फोटो तथा ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर उच्चतम न्यायालय की 5 सदस्यीय पीठ ने सर्व सम्मत कहा "यह 14000 वर्ग फुट भूमि रामलला की है।"

आस्था और विश्वास की विजय हुई।

न्यास का गठन

भारत सरकार ने 5 फरवरी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन कर अधिग्रहित 70 एकड़ भूमि न्यास को सौंप दी। 25 मार्च 2020 को रामलला तिरपाल के मंदिर से बाहर आकर अस्थाई नवीन मंदिर में विराजमान हुए।

स्वप्न-संकल्प की सिद्धि

5 अगस्त 2020 को सदियों की स्वप्न-संकल्प की सिद्धि का वह अलौकिक क्षण आ गया जब पूज्य महन्त नृत्यगोपाल दास जी सहित देश भर की 36 विभिन्न आध्यात्मिक धाराओं के प्रतिनिधि पूज्य सन्तों एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के पावन सानिध्य में भारत के जनप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भूमि पूजन कर मन्दिर निर्माण का सूत्रपात कर दिया।

देश की 3000 से अधिक पवित्र नदियों के जल तथा विभिन्न तीर्थों, जाति-जनजातियों के श्रद्धा-केन्द्रों, ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों तथा बलिदानी कारसेवकों के गृह-स्थानों से लाई गई पवित्र मिट्टी ने मानो संपूर्ण भारतवर्ष को "भूमि पूजन" में उपस्थित कर दिया।

भूमि पूजन समारोह में पूज्य संतों ने यह आह्वान किया कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनने के साथ साथ ही जन-जन के हृदयों में भी राम मंदिर विकसित होना चाहिए। श्रीराम 14 वर्षों तक नंगे पैर  वन-वन घूमे। उन सभी के पास जाकर मित्रता की, जिन्हें आज अनुसूचित जाति और जनजाति कहा जाता है। श्रीराम ने अहिल्या-उद्धार कर नारी की गरिमा को पुनर्स्थापित किया। असुरों का विनाश कर आतंकवाद का समूल नाश किया था। राम राज्य में भूख, बीमारी, भेदभाव, अशिक्षा, निर्धनता  और अधर्म नहीं था। ऐसा ही भारत अपने सामूहिक पुरुषार्थ से हमें पुनः बनाना है।

आवाहन

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास गठित होते ही मंदिर निर्माण में अपने योगदान के लिए सम्पूर्ण विश्व के हिंदू आतुर हैं। छोटे बड़े सभी प्रकार के दान प्राप्त हो रहे हैं। श्रीराम ने सागर सेतु के निर्माण में गिलहरी की भूमिका का भी आदर किया था।

राम मंदिर निर्माण का यह भगवत् कार्य भी जन जन के व्यापक सहयोग से ही सम्पन्न होगा। समाज का सहयोग प्राप्त करने के लिए विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता आपके गांव और घर में आएंगे। हम समस्त समाज का आवाहन करते हैं कि मंदिर निर्माण के इस पुण्य कार्य में उदार हृदय से अपना आर्थिक सहयोग समर्पित करें।

ऐसा बनेगा भव्य श्रीराम मन्दिर

कुल क्षेत्रफल - 2.7 एकड़

कुल निर्माण क्षेत्र - 57.400 वर्गफुट

कुल लम्बाई - 360 फुट

कुल चौड़ाई - 235 फुट

कुल ऊँचाई (शिखर तक) - 161 फुट

मण्डपों की संख्या - 5

कुल तीन तल होंगे, प्रत्येक तल की ऊँचाई - 20 फुट

स्तम्भों की संख्या - भूतल-160, प्रथम तल-132, द्वितीय तल-74

शारीरिक अशक्त जन हेतु लिफ्ट एवं रैम्प संख्या - 2

बैंक खाता - विवरण

Saving Account           :         39161495808

Current Account         :         39161498809

IFSC Code                    :         SBIN0002510

PAN No.                        :         AAZTS6197B

निवेदक

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र

कैम्प कार्यालय-रामकचहरी आश्रम, रामकोट, अयोध्या-224123 उ0प्र0

Email - contact@srjbtkshetra.org              Website  : https://srjbtkshetra.org

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